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सूर्यकुमार यादव के कारण भारत वर्ल्ड कप हार गया, इस आरोप के साथ सोशल मीडिया में सूर्यकुमार यादव को ट्रोल किया जा रहा है।

सूर्यकुमार यादव के कारण भारत वर्ल्ड कप हार गया, इस आरोप के साथ सोशल मीडिया में सूर्यकुमार यादव को ट्रोल किया जा रहा है। 
फाइनल खत्म हुए 72 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका, लेकिन सूर्यकुमार यादव की ट्रोलिंग थमने का नाम नहीं ले रही। जब से सूर्यकुमार यादव को भारत का नया T-20 कप्तान बनाया गया है, तब से सूर्या के प्रति नफरती बयानों की बाढ़ सी आ गई है। जिस अखबार में विराट कोहली पर शतक के लिए खेलने का आरोप लगाया गया था, अब वह अखबार कह रहा है कि सूर्यकुमार यादव सिर्फ नाम के एक्स फैक्टर हैं। डिमांड की जा रही है, सूर्यकुमार यादव से कप्तानी वापस ली जाए और उन्हें भारत के लिए किसी भी फॉर्मेट में खेलने का अवसर नहीं दिया जाए। किसी भी खिलाड़ी के लिए यह बेहद निराशाजनक होता है। फाइनल में भारत के लिए कोई भी खिलाड़ी उम्मीद पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा, पर टारगेट सिर्फ सूर्यकुमार यादव को किया जा रहा है। हम आपको बताने का प्रयास करते हैं, सूर्यकुमार यादव भारत का T-20 कप्तान बनना डिजर्व क्यों करते हैं?











हकीकत यह है कि सूर्यकुमार यादव ने 53 T-20 इंटरनेशनल मैच में 172.70 की स्ट्राइक रेट और 46.02 की एवरेज के साथ 1841 रन बनाए हैं। इस दौरान सूर्यकुमार यादव के बल्ले से 15 अर्धशतक और 3 शतक आए हैं। आज भी सूर्यकुमार यादव ICC T-20 इंटरनेशनल रैंकिंग में दुनिया के नंबर वन बल्लेबाज हैं। हार्दिक पांड्या के चोटिल होने की वजह से टी-20 इंटरनेशनल में उप कप्तान सूर्यकुमार यादव को अब कप्तान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में वर्ल्ड कप फाइनल के आधार पर सूर्यकुमार यादव को T-20 कप्तानी से वंचित करना किसी भी लिहाज से उचित नजर नहीं आता। वर्ल्ड कप फाइनल में सूर्यकुमार यादव 28 गेंद पर 18 रन बना सके। यह प्रदर्शन सूर्यकुमार यादव के नाम के अनुरूप नहीं है। हम आपके लिए वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पॉइंट लाए हैं। सबको पता है कि 11वें से 40वें ओवर के बीच में 30 यार्ड सर्कल के बाहर सिर्फ 4 खिलाड़ी रहते हैं। आखिरी 10 ओवरों में यह संख्या 5 हो जाती है। 

जिस वक्त 29वें ओवर की तीसरी गेंद पर विराट कोहली आउट हुए, भारत का स्कोर 4 विकेट के नुकसान पर 148 रन था। सर्कल के बाहर इस वक्त कम फील्डर थे और सूर्यकुमार यादव खुलकर अपने शॉट्स खेल सकते थे। अगले 12 ओवर तक सूर्या राहुल के साथ फील्ड रिस्ट्रिक्शन का फायदा उठा सकते थे। भारतीय टीम मैनेजमेंट ने सूर्यकुमार यादव की जगह रवींद्र जडेजा को बल्लेबाजी के लिए भेज दिया। रवींद्र जडेजा 22 गेंद पर सिर्फ 9 रन बना सके। रवींद्र जडेजा के आउट होने के बाद सूर्यकुमार यादव और केएल राहुल के तौर पर भारत की प्रॉपर बल्लेबाजों वाली आखिरी जोड़ी मैदान पर थी। इसका नुकसान हुआ कि सूर्यकुमार यादव के दिमाग में यह बात बैठ गई, उनके बाद भारत के पास कोई स्पेशलिस्ट बल्लेबाज नहीं है। अब सूर्यकुमार यादव के पास नेचुरल गेम खेलने का ऑप्शन नहीं था। उन्हें विकेट बचाकर बल्लेबाजी करनी थी। इसके बाद केएल राहुल भी आउट हो गए।

कोई भी भारतीय गेंदबाज बल्लेबाजी में माहिर नहीं है। ऐसे में सारा दबाव अकेले सूर्यकुमार यादव पर आ गया। सूर्यकुमार यादव पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ सामंजस्य बिठाकर बल्लेबाजी नहीं कर सके। हेजलवुड की धीमी बाउंसर पर विकेटकीपर को कैच थमा बैठे। आदर्श स्थिति में सूर्यकुमार यादव को बैटिंग क्रम बदलने के बावजूद परफॉर्म करना चाहिए था। परंतु पूरे वर्ल्ड कप सूर्या जिस पोजीशन पर खेले, फाइनल में उसे चेंज करना समझ से परे है। वर्ल्ड कप खत्म होने के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ T-20 सीरीज खेलने के लिए तैयार है। सूर्यकुमार यादव पहली बार भारतीय टीम की कप्तानी करने जा रहे हैं, ऐसे में उन्हें हमारे समर्थन की दरकार है। ऐसे में सूर्यकुमार यादव ट्रोल करना सही नहीं लगता


 

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