Che Guevara: जानिए एक महान क्रांतिकारी, डॉक्टर, लेखक
आज हम बात करेंगे एक ऐसे शख्स की जिसे क्रांति का प्रतीक माना जाता है | जिसकी तस्वीरें आपको किसी टी-शर्ट , किसी के दीवार ,किसी बुक आदि पर छपे हुए मिल जाएंगे |
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| अर्नेस्टो चे ग्वेरा |
तो आज हम बात करेंगे "चे" जिनका पूरा नाम अर्नेस्टो चे ग्वेरा है |इनका जन्म 14 जून 1929 को रोजारियो अर्जेंटीना में हुआ था| क्यूबा की क्रांति में चे ग्वेरा जितना शायद ही किसी का योगदान रहा हो | यह एक क्रांतिकारी के साथ-साथ डॉक्टर,लेखक, राजनीतिज्ञ व कूटनीतिज्ञ भी थे |युवावस्था में चे तथा इनके साथ एक मित्र ने एक छोटी मोटरसाइकिल से पूरे लातिनी अमेरिका की यात्रा की |जहां पर व्याप्त गरीबी,भुखमरी व असंतोष ने इन्हें हिलाकर रख दिया | उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि इन सभी समस्याओं का हल सिर्फ विश्व क्रांति है | उसी समय क्यूबा में तानाशाह फुलगान्सियो बतिस्ता से वहां की जनता ऊब चुकी थी | फिदेल कास्त्रो वहां की जनता का दिल जीतने में कामयाब हो रहे थे |फिदेल कास्त्रो ने अमेरिकी समर्थन वाले बतिस्ता सरकार के खिलाफ क्रांति छेड़ रखा था |इस क्रांति में चे फिदेल कास्त्रो के साथ हो गए और 1958 में सरकार का तख्तापलट दिया |
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| अर्नेस्टो चे ग्वेरा अपने साथियों के साथ |
वहां के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो बने | सरकार के गठन के बाद राष्ट्रपति फिदेल ने इन्हें दुनिया के देशों से संबंध कायम करने का जिम्मा दिया |इसके अलावा चे को सेना का कमांडर भी बनाया गया | वहां कुछ समय तक सेवा करने के पश्चात इन्होंने सेना के कमांडर का पद छोड़ दिया और दूसरे देशों में क्रांति के सूत्रपात के लिए क्यूबा भी छोड़ दिया | बतिस्ता के सरकार को गिराने के बाद चे अमेरिका के आंखों की किरकिरी बन गए थे |अमेरिका इनकी हत्या करवाना चाहता था | इनके नाम के बारे में अक्सर पूछा जाता है कि आखिर यह नाम से आया कहां से तो बता दे जिस तरह हमारे यहां भाई ,ब्रो ,ड्यूड दोस्त बोला जाता है वैसे ही क्यूबा में "चे" बोला जाता है |क्योंकि इनकी लड़ाई सरकार के विरुद्ध थी इसलिए सरकार द्वारा इन्हें मारे जाने का भी खतरा था| इसलिए इनके क्रांतिकारियों का जो समूह था वह अक्सर जंगलों ,पहाड़ों जैसे दुर्गम इलाकों में डेरा डाला करते थे |जहां सेना का पहुंचना मुश्किल हो |
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| अर्नेस्टो चे ग्वेरा |
चे ने क्यूबा में जितने भी सेना या सरकार के मुलाजिम थे उन पर गोरिल्ला वार किया अर्थात जब वह सोते होते तब उन पर हमला किया करते थे |इनके क्रांतिकारियों के छोटे से समूह से पूरे सरकार ने हार मान लिया और देश की सत्ता फिदेल के हाथ में सौंप दी | 31 वर्ष की उम्र में चे को राष्ट्रीय बैंक का अध्यक्ष और देश का उद्योग मंत्री बनाया गया |
8 अक्टूबर को अमेरिका ने अपने सर्च अभियान के जरिए "चे"को गिरफ्तार कर लिया और उसके अगले ही दिन 9 अक्टूबर 1967 को चे की हत्या कर दी |
समाजवाद और क्रांति का चेहरा बना ये सितारा आज भी लोगों के दिलों में बसता है|
निष्कर्ष (Conclusion)
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